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Success Rate

मैं अक्सर महसूस करती हूँ  कि कभी कोई विचार , कोई सुझाव मेरे दिमाग में  आता है जिसका मैं किसी से कोई चर्चा भी नहीं करती लेकिन कुछ समय बाद पता चलता है कि किसी ने ऐसा कर दिया और तब ऐसा लगता है जैसे हम जो सोचते है, हो जाता है जैसे किसी और का दिमाग भी मेरे दिमाग से connected है , बस मैंने सोचा और किसी ने implement करदिया

आपके साथ भी ऐसा होता होगा कि आपने सोचा …………….पानी से चलने वाली bike  होनी चाहिए , और कुछ समय बाद आपको पता चला कि किसी ने ऐसे bike को बना दिया है जैसे किसी ने आपके विचारो को चुरा लिया हो

actully दोस्तों ये god का success rate है

एक ही idea करोड़ो लोगों के दिमाग में आता है , लाखों लोग इसके बारे में गंभीरता से सोचते है , हजारो लोग plan तैयार करते है जिनमे से 100 लोग उस plan को execute करते हैं और कोई एक सफल होता है ,

अब आप सोच रहे होंगे कि ये सब क्या है…………………………. ये है god कि कोशिशे

नहीं समझे ………………….

कहते है इंसान god का creation है जिसे निखारने कि वो हमेशा कोशिशे करता है लेकिन करोड़ो में से कोई एक ही होता है जहाँ उन्हें success मिलता है|लेकिन वो कोशिशे करना नहीं छोड़ते |

बहुत सीधी सी बात है कि एक बार में तो god भी success नहीं होते , success rate तो उनका भी कम है|

हम तो इंसान है तो लाखों बार गिरना तो बनता है क्या फ़र्क पढता है कि कई बार कोशिशे करने पर भी सफल नहीं हो पा  रहें , हमारे अंदर भी करोड़ो में छिपा वो एक आदमी है जो आज नहीं तो कल सफल जरूर होगा

बस कोशिशे कीजिये और नये नये experiments और नये नये तरीके आजमाइए और कुछ नहीं तो at least ये तो पता चलेगा कि इस तरीके से हम सफल नहीं हो सकते , जैसे edison को पता थे 1000 तरीके , जिनसे बल्ब नहीं बन सकता|

करोड़ो में से कोई एक सिर्फ इसलिए सफल नहीं होता क्यूंकि उसमे कुछ अलग है , वो सफल होता है क्यूंकि वो कोशिशे करना नहीं छोड़ता |

करोड़ो लोग जो अपने creator को गलत साबित करते है लेकिन कोई एक विशवास करता है और सफल होता है , क्या फ़र्क पढता है कि हमारे आस पास के कुछ लोग हमे गलत साबित करने की कोशिश करते है ……………..खुद पर विश्वास कीजिये और अपना काम करते रहिये

क्यूंकि आपकी कोशिशे ही आपकी कहानी है

Keep Try

 

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कुछ बातें …..बस यूँही

कभी कभी बिना किसी बात के बात करने में भी बढा मज़ा आता है , बातों  में से बातें निकलती रहती है और बात आगे बढ़ जाती है फिर इसका अंत क्या होगा पता नहीं , कोई यूँही कोई बात कर देता है और कोई यूँही बात पकढ़ लेता है,  और फिर बाते इतनी उलझ जाती है कि उन्हें सुलझाने के लिए फिर से बाते करनी पढ़ती है

उफ्फ्फ्फफ्फफ्फ्फ़ …………ये बाते …..अब देखिये कल एक जनाब बेचारे कमल को लेकर बैठ गए…..अरे रे रे …. नहीं …………..में कमल के फूल की बात कर रही हूँ जो कीचढ़ में खिलता है वो साहब इस बात से बढे उत्साहित थे कि कमल कीचढ़ में खिलता है …. या…… शायद वो ये कहना चाहते थे कि वो कीचढ़ में खिलता है इसलिए कमल है या वो कमल है इसलिए कीचढ़ में खिलता है

मै उनसे ज्यादा confused थी ……क्या फ़र्क पढता है ….. वो कमल है और कीचढ़ में खिलता है, क्या इतना जानना काफी नहीं।

सोचना तो तब चाहिए जब कीचढ़ में कमल न खिले या कमल बिना कीचढ़ के खिले ………

ये जिंदगी है दोस्तों …..इसमें हमेशा if and but की जरूरत नहीं होती ये बस चलती है और चलती रहती है | ये अपने समय से शुरू होती है और समय पर ख़तम हो जाती है ….

ये तो आपकी इच्छा है …..कि आप कमल की ख़ूबसूरती और उसके गुणों का आनंद ले और अपने जीवन में उतारे या फिर ये सोचने में निकल दें कि कमल कीचढ़ में ही क्यों खिलता है. …..

वैसे कुछ महान लोग ऐसे भी है जो पूरी जिंदगी कमल को ये समझाने में निकाल देते है कि वो कमल है और उसे कीचढ़ में ही खिलना है ये ही उसकी किस्मत है कि वो कीचढ़ में ही रहे |  और बेचारा कमल इस confusion में आजाता है कि ये मुझे convince कर रहा है या खुद को | अब जो कमल खुद को unique समझ रहा था complex हो कर depression में है |

उससे भी बुरी हालत तो बेचारे कीचढ़ की है………जो इतनी बार कीचढ़ शब्द सुन कर इतना  दुखी  है कि वो भूल गया है कि उसमे एक बहुत खूबसूरत फूल को खिलाने की क्षमता है और वो एक ऐसा कारण है जो कमल को और फूलों से अलग करता है उसकी ख़ूबसूरती बढाता है

यहाँ कुछ भी ऐसा नहीं जो बेवजह है या बेकार है , हर चीज़ की अपनी एक ख़ूबसूरती है, खासियत है।किसी के बढ़े होने का एहसास किसी के छोटे होने से ही होता है…..

यहाँ सब अधूरे है……और किसी न किसी को पूरा करते है………..

खेर ……………उन  साहब से बातों बातों में जो बात मुझे  समझ आई यूँही मैंने आपके साथ share की ……जो बात आपको समझ आये आप भी मेरे साथ share करें……….

तो दोस्तों बातें करें और बातों में से बातें निकलते रहें ……मेरी यही दुआ है कि आपकी बातें यूँही चलती रहें लेकिन कोई बात कभी समझ आये तो हमें जरूर बताये क्या पता फिर कोई नयी बात हो जाये और फिर बातो में से कोई बात निकल आये और इस तरह आपके और हमारे बात करने का सिलसिला यूँही चलता रहे……

अगर यूँही की गयी ये कुछ बातें आपको पसंद आयीं हों, तो मुझे भी बताइये और share करिए औरों के साथ और देखिए और क्या क्या बाते निकल कर आती हैं…..

 

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A Letter……From a Mother

Today I finish my all chours, I call everyone to lunch and start to serve….Suddenly my husband’s phone rang up …So he request me to mix his food. Suddenly my son came and kiss my cheeks and smile cutely. Surprisingly I asked him the reason for this lovely gift….He replied

Mumma you do everything for us and we take privilege of it. Now you are making food easy for papa as you always do for me. But you have not served for self yet. So I kissed you to make you feel that you are my beat mumma…..

His these words touched my heart and make that moment very precious for me. He is only 6 yrs old and he was thinking so deep. For a while I thought that really I was doing something different…….

My dear son…….Thanks for your Love towards me. I want to let you know that…I was not special and different then other’s. I was an ordinary person like all butyou made me diffrent, special and extraordinary and precious fir yourself . You made me realized that I can spend whole night without sleeping with you, and I can cook many of time in a day as per your demand…..I am strong enough to escape you from bad people…You made me extra careful, you taught me better time management.

I did not care you alone. Your father made everything better for you . Your Father help me to become more capable for being more caring for you.

Me and you father do all efforts to provide you all your needs. But that was you , who make us realized that how much efforts we need to make you successful and good person in life.

You ever help us for being and remain always good in life.

My son what we did and do for you is not our favour on you . This is our duty to make you capable to meet this world and to make you strong enough .It was our duty to provide you healthy and happy atmosphere.

Still you feel that we favour you then don’t worry…….After a time period you will be in same stage where you will be a provider and you will be blessed with an Angel….Then it will be your duty to be a role models

Now I just want to say you my friends don’t treat your child as a owner…Treat them like a gardner….As he seed a plant take Care of it and only help him grow well give him a direction and do his all efforts to grow it well ……Such as , water you child direct your child help him to grow well …..You can give them a strength as they can dream but we can not design their dreams. Our parents give us life for us as well we are to give our child and they are to serve their…….

This is the chain….So add on some batter

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My rough copy

आज एक मित्र ने एक संदेश भेजा जिसमें स्कूल के समय में प्रयोग में आने वाली rough copy का जिक्र था। सारी पुरानी यादें ताज़ा हो गयी। तो सोचा इस खजाने में से कुछ मोती आप सब के साथ भी बाटें जाये।

वैसे आज का blog मैं हिंदी में लिख रही हूँ। क्यूंकि जिस समय की बातें हम कर रहे हैं, उस समय थोड़ी सी english और कुछ ज्यादा सी hindi होती थी। जिसका इस्तेमाल हम आज तभी करते हैं, जब हमें अपने गुणवान होने का सबूत नहीं देना होता।

लेकिन उस समय हम सबको गर्व से बताते थे, कि ‘हिंदी’ हमारी मातृभाषा है।तब हमारे संवाद का माध्यम भी हिंदी ही हुआ करता था।

इसके अलावा एक और भाषा का प्रयोग जोर शोर पर होता था। चित्रण भाषा । चित्रों के माध्यम से अपने मन की भावना की अभिव्यक्ति । जो एक विशेष प्रकार की copy में हुआ करता था , जिसे हम rough copy कहते थे।

rough copy सुनते ही आपके मस्तिष्क में एक मोटे से register की आकृति उभरी होगी। जिसके page साँवले होते थे। लेकिन उन साँवले pages पर हमारा मन साफ साफ झलकता था। वो copy तो rough होती थी, लेकिन उस पर हम सब कुछ fair लिखते थे। किस teacher को किस नज़र से देखते हैं, इसका पता उस rough copy के किसी न किसी page से चल ही जाता था। उनकी शक्ल जो बनाते थे…अच्छी सी…….।

आज कितना मुश्किल है किसी को जान पाना । किसी का मन पढ़ पाना । लेकिन तब वो rough copy सारे राज़ खोल देती थी। उसमें बने वो सफ़ेद चंचल पानी के झरने, जो नीचे गिरते ही नदी बन जाते थे। वो हमारी आकांक्षाओं से ऊँचे पर्वत, जिन्हें चीर कर सूरज उगाते थे……नदी के किनारे छोटा सा घास का मैदान……..जहाँ सुकून के पल ऐसे ही बीत जाते थे। उस नदी में एक नाव भी होती थी जो हमे पार उतारती थी….हमारी मंज़िल तक पहुंचाती थी। मैदान में एक पेड़ होता था…..जो पहाड़ो से भी ऊँचा होता था….जिसमें हमारी पसंद की आकृति की पत्तियां, फूल और फल होते थे। उस पेड़ के नीचे महलों से बढ़ी एक झोपड़ी …..जिसमे हम रहा करते।

कुछ पिछले पन्नों को सिर्फ अपने लिए छोड़ना। उसमें चुपके से दोस्तों की खटपट लिखना, तरह तरह से अपना नाम लिखना और सबसे सुंदर लिखावट को ढूंढना। project के नाम पर कई रंगों के pens लेना उस rough जैसी copy में beautiful सी rangoli बनाना । दोस्ती ki कसमें , जिंदगी की ख्वाइशें , सारे लड़ाई झगड़े एक ही line में लिखना।

बहुत ही fair थी वो rough copy, मेरा आइना थी। एक ही page में न जाने कितनी कहानियां थीं। दिल के करीब, सबसे अज़ीज़, और सबसे कीमती, शायद इसीलिये rough थी। क्यूंकि अगर साफ़ सुथरी चमकदार होती तो कहाँ उकेर पाते हम खुद को इस तरह…..। न जाने कितने ही चेहरे, कितनी कहानियां, कितनी कविताएं और कितने ही पल खुद में समेटे हुए थी मेरी rough copy। जिसमे लिखने का कोई सलीका नहीं होता। कोई भी शब्द line पर नहीं होता। और ना ही शब्दों का कोई आकार होता।

लगता है जैसे जिंदगी की बारीकियां सिखा रही थी। खुद का कोई रंग नहीं पर मुझे हर रंग से मिलवा रही थी

काश आज भी मेरे पास होती कोई rough copy, जो जानती मुझे, जैसी मैं हूँ। जो मेरा आइना बन जाती, मुझे मुझसे मिलाती। जिसमें मैं कई बार मुरझाती और कई बार खिलखिलाती, वो झरने ,वो नदी, वो झोपड़ी फिर से ढूंढ़ लाती…….लेकिन आज मैं उसे किसी से नहीं छुपाती…… सबको बताती और समझाती कि……..फिर से चाहिए हमें

वो प्यारी सी हमारी सी fair सी rough copy

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दृष्टि-Third Eye 🎭

जब हम digital India के बारे में बात करते हैं तो बहुत सारी चीज़ें याद आती हैं।एक विशाल India जहां सब एक दूसरे के साथ बहुत व्यस्त हैं । आप सही समझ रहे हैं , मैं उसी media की बात कर रही हूं, जो बहुत social है। वैसे मैं digital India के खिलाफ नहीं हूं। ये हमें वो पंख देते हैं, जिनसे हम बिना उड़े, पूरी दुनिया की सैर कर आते हैं। ना जाने कितने ही मष्तिष्क रूपी नगरों में घुमक्कड़ विचारों से मुलाकात हो जाती है, और यूँ ही जान पहचान सी बन जाती है।

लेकिन अगर हम बात करें प्राचीन समय की तो……माफ करियेगा, प्राचीन इसलिए बोला क्योंकि आज से10-15 साल पीछे देखा जाए तो, एक जमाना गुज़रा हुआ ही लगता है। उस वक्त digital के नाम पर सिर्फ एक ही नाम याद आता था। जिसे camera कहते थे।

Camra एक ऐसा यंत्र, जो कुछ पलों के लिए जैसे हमारी जिंदगी रोक देता और उन पलों को खुद में कैद करलेता।  ऐसे नैना जो एक मामूली सी जगह को खास बना देते।

ये एक ऐसी दृष्टि है जो वो दिखा देती है जो खुली आँखों से नहीं देखा जा सकता। यूँ तो सामने से कितने ही नज़ारे गुज़र जाते हैं। लेकिन कुछ अलग हो जाते हैं जब इस तीसरी नज़र के कैद में आते हैं।। भीड़ में चलता एक आम चेहरा अचानक से आकर्षण का केंद्र बन जाता है।

अब देखिए ना…..वैसे तो सड़क पर बहुत सारे ऐसे बच्चे मिलते हैं जिनको देख कर उनकी साधनहीन जिंदगी का एहसास होता है। लेकिन कम ही हमारा ध्यान उधर जाता है….जैसे ये सब देखना भी हमारी जिंदगी का एक हिस्सा ही है, लेकिन जब ये तीसरी नज़र के कैद में आता है, अचानक से खास बन जाता है…..उसकी आँखों का खाली पन, मनमौजी, मस्तमौला जिंदगी, बेफिक्र ख्याल और उनमें लाखों सवाल जैसे पूछ रहे हों कि…..हम क्या तीसरी दुनिया के प्राणी है जो हमारी तस्वीर ले रहे हो… ये सब कुछ ही पल में हमारे मन में उतर जाता है।

कुछ दिन पहले ही मेरी नज़र ऐसी ही एक तस्वीर पर पड़ी, जिसमें एक बुजुर्ग अपने घर के बाहर बैठे, सड़क पर दौड़ती गाड़ियों को ऐसे देख रहे हैं जैसे वो उन्हें उनकी रुकी हुई जिंदगी का एहसास करा रही हों। उनकी खाली आँखे अपने होने का मकसद पूछ रहीं हों। अपना वजूद तलाश रहीं हो। जैसे सड़क पर दौड़ती भागती जिंदगी से कह रहें हों…………..

एक दिन ठहर जाओगे तुम भी मेरी तरह, मैंने भी बहुत दौड़ लगाई है एक जमाने में…….

अज़ीब सी ताकत है इस तीसरी नज़र में, जिंदगी का एक पल pause करती है और उस पल के नाजाने कितनी ही कहानियां बन जाती है

काश हमारे पास भी होती वो तीसरी नज़र और हम समझ पाते किसी के आंसुओं में छिपी खुशी, मुस्कान में छिपा एक एहसास, शोर में छिपी खामोशी, । हम कैद कर पाते हर पल और जान पाते कि हर पल कितना खास है। हम समझ पाते कि कितने ही छोटे छोटे पल हमने पीछे छोड़ दिये जो बहुत खास थे, जान पाते उन बातों की गहराई जो मामूली सी लगती थीं। हर वो खुशी जो छोटी सी लगती थी……..काश मेरे पास होती वो तीसरी नज़र, जिससे मैं देख पाती ऊंची उड़ती पतंग की ऊंचाई, जो वहां से भी मुस्कुराकर नीचे देखती है। सुखी जमीन पर निकला एक अकेला फूल, सूखे उजड़े पेड़ पर कुछ हरी पत्तियां, साथ खेलते बच्चे, …….काश खुली आँखों से देख पाते कि हर पल , हर शख्स हर नज़ारा खुद में कुछ खास है।बस हमें देखने के लिए वो नज़र चाहिए जिससे हम भी filter कर पाए अच्छाइयों को जैसे ये तीसरी नज़र करती है।

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